सुख की लालसा से ही मन भटकता ही की वहां सुख मिलेगा ?
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तुम स्थिर बैठ जाओगे तो मन ठीक है ही, तुम्हे ठीक करने की जरूरत नही है
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मन और विचार एक है, अलग नही है, क्यों की मन से ही विचार आते हैं
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जब मन अशांत हो, तो गाने- बजाने और भजन करने से मन ठीक हो जाता है
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मन को जितना हठ योग है, मन से हार मानकर सरणागत होना प्रेम है,
प्रेम मैं सदा हार ही होती है, देखो हम जिसे प्रेम करते हैं उसके सामने झुकते हैं
वह चाहे कुछ भी कहे, चाहे कुछ भी करे
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दुसरे को न देखकर अपने मन को देखो की मन मैं उसके प्रति क्या भाव उठा है ?
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जब हम दुखी होते हैं तो मन मैं रहते है, जब हम सुखी होते हैं तो आत्मा में रहते हैं
मन का स्वभाव है दुखी होना और आत्मा का स्वभाव है खुश रहना, आनंद में रहना
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मन को जिस काम के लिए जितना मना करो, मन उतना ही उस काम को करना चाहता है,
इस लिए मन को मना मत करो, जो मन कर रहा है करने दो, बस आप शरीर से नही
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मन को अपने आप में लगाओ, बाहर नही लगने दो, क्योंकि बाहर लगने से दुःख ही होगा
ध्यान से मन शांत होता है, स्थिर होता है, हमें ध्यान करना चाहिए
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जब मन शांत होगा तो आत्मा का दर्शन होगा, जिस तरह जब तालाब का पानी स्थिर,
शांत होता है तो हमारा प्रतिबिम्ब उसमे दीखता ही
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ध्यान करने से मन साफ़ होता है, जैसे पानी गंदा है पानी में हलचल है,
तो हम अपना प्रतिबिम्ब नही देख पाते है, उसी तरह मन में हलचल है,
तो हम अपना स्वरुप नही देख पाते, इसलिए ध्यान करना ज़रूरी ही
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जब कोई आप के साथ कुछ समय के लिए रहता है तब उसे जाने पर मन दुखी हो जाता है
क्योंकि आप इस दौरान उस व्यक्ति से बंध गए,
आप जब ज्ञान में उतर जाओगे तो पता चलेगा की आप ना
बंधते हैं, ना ही दुखी होते हैं
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मन हमेशा नीचे की और जाता है, ग़लत कामों और विषय वासनाओं में
मन को मारो नही, सुधारो, साफ़ करो
जब मन साफ़ होता है तो भक्ति, निष्ठा और प्रेम का उदय होता है
Friday, April 24, 2009
Thursday, April 16, 2009
Guru Meri Pooja - Dedicated to H H Sri Sri Ravi Shankar
Guru Meri Pooja - Dedicated to H H Sri Sri Ravi Shankar
Guru Meri Pooja sung by Anil Hanslas, Album:Satguru Main Teri Patang.
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Thursday, February 12, 2009
Transform youself - Knowledge points by Sri Sri Ravi Shankar
Transform youself - Knowledge points by Sri Sri Ravi Shankar - Must read or download
Sunday, February 1, 2009
This Drama
What is it you are hanging on to? How long will you continue this play, this drama? What is happening? Hmm?
तुम किसके लिए अटके हुए हो? कब तक तुम इस खेल को, इस नाटक को खेलते रहोगे? क्या हो रहा है? हम्म?
तुम किसके लिए अटके हुए हो? कब तक तुम इस खेल को, इस नाटक को खेलते रहोगे? क्या हो रहा है? हम्म?
The Human Body
There is hope for every soul, for every human being, to live unconditional love. That is why human body is so precious---because in this body you have the ability to erase all the unwanted negative impressions.
प्रत्येक आत्मा के लिए, प्रत्येक इंसान के लिए यह आशा है की, वेह निःस्वार्थ प्रेम में जी सकता है. इसीलिए इंसान का शरीर इतना अनमोल है---क्योंकि इस शरीर में तुम्हारे पास यह योग्यता है की तुम हर अनचाहे नकारात्मक छाप को मिटा सकते हो.
प्रत्येक आत्मा के लिए, प्रत्येक इंसान के लिए यह आशा है की, वेह निःस्वार्थ प्रेम में जी सकता है. इसीलिए इंसान का शरीर इतना अनमोल है---क्योंकि इस शरीर में तुम्हारे पास यह योग्यता है की तुम हर अनचाहे नकारात्मक छाप को मिटा सकते हो.
Angels
They are very jealous of human beings, the angels, because as human being you can experience Divine Love. So they have to be born as human beings in order to become a devotee, in order to experience Divine Love. वेह इंसान से बहुत इर्ष्या करते हैं, देवता, क्योंकि इंसान हो कर तुम इश्वर्य प्रेम को अनुभव कर सकते हो. इसलिए उन्हें भक्त बन्ने के लिए, इश्वर्य प्रेम को अनुभव करने के लिए इंसान के रूप में जनम लेना होता है.
God and Devotees
God is all over. God is in the stone. God is in the flowers. God is in the garbage can. God is all over, but devotee is not all over. So God runs behind His devotees. To God, devotees are very dear, so dear.
इश्वर सब जगह है. इश्वर पत्थर में है. इश्वर फूल में है. इश्वर कूडेदान में है. इश्वर सब जगह है, परन्तु भक्त सब जगह नहीं है. इसीलिए इश्वर अपने भक्तों के पीछे दौड़ता है. इश्वर को, भक्त बहुत प्रिय हैं, बहुत प्रिय.
इश्वर सब जगह है. इश्वर पत्थर में है. इश्वर फूल में है. इश्वर कूडेदान में है. इश्वर सब जगह है, परन्तु भक्त सब जगह नहीं है. इसीलिए इश्वर अपने भक्तों के पीछे दौड़ता है. इश्वर को, भक्त बहुत प्रिय हैं, बहुत प्रिय.
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