Sunday, February 1, 2009

Incomplete and Infinite

Love is incomplete. And it will have to remain incomplete. If it completes, it finds an end. Whatever is completed, whatever is full, total, that means you have marked the boundaries, you have found its limitations. For love to be infinite, it has got to be incomplete. Whatever is incomplete is infinite.
प्रेम अधूरा है. और उसे अधूरा ही रहना है. यदि वेह पूर्ण हो जाता है, वेह अनंत खोज लेता है. जो कुछ भी पूर्ण हो चूका है, जो कुछ भी भरा है, सम्पूर्ण है, अर्थात तुमने सीमा खेंच्ली है, तुमने उसकी सीमा खोज ली है. प्यार को अनंत होने के लिए, अधूरा रहना होगा. जो भी अधूरा है वेह अनंत है.

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